दुरूह लक्ष्य है, दुर्गम पथ है
ऊंचे पर्वत सी चुनोतियाँ, झंझावत का कोलाहल है,
क्या हुआ जो सागर जल अपार है,
नौका तेरी, पतवार भी तेरी,
बाजू तेरे ताकत तेरी,
लड़ जा भीड़ जा चढ़ जा साथी,
आशाएं अनंत है, अनंतिम प्रयास है
जो करना हो कर जा साथी
लड़ जा भीड़ जा चढ़ जा साथी
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