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दुनिया

क्या है यह दुनिया 
शंकर का दर्शन या हॉकिन्स का विज्ञान
स्याह दृष्टि या दृष्टि भ्रम है, या बस एक ऐनक है जो रंग कर देता है स्याह
भूख है या रोटी की महक है यह दुनिया, या भ्रम है कि भूख है, या रोटी ही भ्रम है
लोहा पिट रही मुस्कान है यह दुनिया या आंखों में पल रहा कोई ख्वाब, 
बाप का अनुशासन या माँ का दुलार है या किसी बंजारे का गीत है,
चल पड़े दरख्तों का अफसाना है दुनिया या रो पड़े समंदर का गान है
हवस से खड़ी हुई इस दुनिया के भीतर पल रहा कोई निःस्वार्थ प्यार है
मौत के संगीत की धुन है यह दुनिया या नवजात शिशु के रूप का सौंदर्य है
बुद्ध के आनंद का प्रवाह है यह दुनिया या चार्वाक की भौतिकता की पुकार है,
स्वप्न दृष्टा मन की अनेक दुनिया, या की विकल्पों के अभावों का सत्य है,
अनवरत फैलती आकाशगंगा सत्य है या प्रतिदिन सिकुड़ती सोच का प्रतिबिंब है यह दुनिया,
मंदिर मस्जिद की दीवार है यह दुनिया या हरिया और जुम्मन का फुटपाथ है
सेक्स की बेहोशी दुनिया का सत्य है या  प्रेमवश माथे पर होंठों का गीला स्पर्श
शक्ति की हवस का प्रवाह है यह दुनिया या शांति की चेतना का प्रवाह है
क्या है यह दुनिया

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धर्म

हम अक्सर सुनते हैं यदि धर्म का आविष्कार न हुआ होता तो यह दुनिया अधिक शांत होती। मजहबी जुनूनो ने इस दुनिया को पागलपन की हद तक हिंसक बना दिया है। ईसाई लड़े, इस्लाम लड़े भी आपस में लड़े। ऐसी ही कुछ लड़ाइयां भारत में भी हुई हैं लेकिन उनका प्रकार अलग रहा है उनका प्रकार रचनात्मक रहा है लेकिन उतना ही रोचक जितना वे हिंसक संघर्ष थे। वैदिक धर्म के आदि स्वरूप की व्याख्याओं से इसका आरम्भ हुआ। ब्राह्मण रचे गए टिकाये लिखी गई। इसी क्रम में विरोधी या कहे नवीन विचार भी सामने आए, इस क्रम में आरण्यक और उपनिषद लिखे गए। इन्होंने कर्मकांडो को चुनौती दी, वैदिक धर्म की प्रार्थना भौतिक जगत तथा इहलोक तक सीमित थी, उपनिषदों ने इन्हें जटिल बना दिया तथा भारत में पारलौकिक जीवन पर तथा वहां के जीवन पर मंथन होने लगा। जीवन, मृत्यु, आत्मा, परमात्मा, स्वर्ग, जगत, माया, पुनर्जन्म आदि सिद्धांतो का प्रतिपादन इन्ही ग्रंथों में हुआ है। तथा ये नए विचार बहुत तेजी से पुराने विचारों को समाप्त करने में सफल हो गए तथा सारे आध्यात्म जगत पर छा गए। किन्तु कर्मकांड तथा वर्ण व्यवस्था जो खंडन मण्डन के मुख्य कारण थे समाप्त नही हुए। वे समाप्त हु...