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Eight immortals according to Indian mythologies भारतीय आख्यानों के अनुसार आठ चिरंजीवी

अमर होना या अमरता को प्राप्त करने का स्वप्न मनुष्य  पृथ्वी पर अपनी उपस्थिति के आरंभिक काल से ही देखता रहा है। भारतीय आख्यानों में भी 8 ऐसे मनुष्यों का उल्लेख हैं जिन्हें अमरता का वरदान प्राप्त है। यह श्रृंखला आपका परिचय इन्हीं immortals से करवाने वाली है। आप उनसे परिचित हैं मैं आपको उस कहानी से परिचित करवाऊंगा जिनका अंत उनकी अमरता पर होगा। इसके अतिरिक्त वह क्षण जब उन्हें अंतिम बार देखा गया उसका वर्णन भी मैं आपके समक्ष रखूंगा।

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धर्म

हम अक्सर सुनते हैं यदि धर्म का आविष्कार न हुआ होता तो यह दुनिया अधिक शांत होती। मजहबी जुनूनो ने इस दुनिया को पागलपन की हद तक हिंसक बना दिया है। ईसाई लड़े, इस्लाम लड़े भी आपस में लड़े। ऐसी ही कुछ लड़ाइयां भारत में भी हुई हैं लेकिन उनका प्रकार अलग रहा है उनका प्रकार रचनात्मक रहा है लेकिन उतना ही रोचक जितना वे हिंसक संघर्ष थे। वैदिक धर्म के आदि स्वरूप की व्याख्याओं से इसका आरम्भ हुआ। ब्राह्मण रचे गए टिकाये लिखी गई। इसी क्रम में विरोधी या कहे नवीन विचार भी सामने आए, इस क्रम में आरण्यक और उपनिषद लिखे गए। इन्होंने कर्मकांडो को चुनौती दी, वैदिक धर्म की प्रार्थना भौतिक जगत तथा इहलोक तक सीमित थी, उपनिषदों ने इन्हें जटिल बना दिया तथा भारत में पारलौकिक जीवन पर तथा वहां के जीवन पर मंथन होने लगा। जीवन, मृत्यु, आत्मा, परमात्मा, स्वर्ग, जगत, माया, पुनर्जन्म आदि सिद्धांतो का प्रतिपादन इन्ही ग्रंथों में हुआ है। तथा ये नए विचार बहुत तेजी से पुराने विचारों को समाप्त करने में सफल हो गए तथा सारे आध्यात्म जगत पर छा गए। किन्तु कर्मकांड तथा वर्ण व्यवस्था जो खंडन मण्डन के मुख्य कारण थे समाप्त नही हुए। वे समाप्त हु...